हरिद्वार। योगगुरु स्वामी रामदेव ने जातीय भेदभाव को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने लगातार जातियों में बढ़ती खाई की वजह से देश में गृहयुद्ध जैसी स्थिति उत्पन्न होने की चेतावनी दे डाली है। साथ ही, जातीय आधार पर किसी भी वर्ग की प्रताड़ना न किए जाने की बात कही है। बाबा रामदेव में देश में बनने वाले कानूनों के एकतरफा न होने कह भी बात कही। दरअसल, हाल के समय में यूजीसी कानून के कारण देश में सवर्ण समाज का आक्रोश बढ़ने का मामला सामने आया है। इसको लेकर कई स्थानों पर लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं। अब इस प्रकार के मामलों पर स्वामी रामदेव का बड़ा बयान आया है। हाल के समय में स्वामी रामदेव और भाजपा के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह बीच लगातार विवाद गहराया हुआ है। इस बीच अब स्वामी रामदेव ने जातीय भेदभाव वाले मुद्दे पर राजनीति गरमा दी है।
जातीय आधार पर बढ़ते विवादों पर स्वामी रामदेव ने कहा कि सवर्ण समाज और जिसको पिछड़ा,एससी एसटी एवं आदिवासी समाज बोला जाता है, उनमें दूरियां बहुत ज्यादा बढ़ गई् हैं। अब इसमें देखा जाए तो देश का संविधान, लोकतंत्र कहता है कि हर नागरिक एक समान है। लेकिन, शैक्षिक संस्थानों में जब बच्चों का एडमिशन होता है तो उन्हें सिखाया जाता है कि तुम अपनी जाति लिखो। जाति के आधार पर तुम्हें आरक्षण मिलेगा। जाति के आधार पर एडमिशन भी होगा। बाबा रामदेव ने कहा कि आरक्षित वर्ग के बच्चों को बताया जाता है कि जाति के आधार पर तुम्हारा सलेक्शन भी होगा। उसी के आधार पर तुम्हारा प्रमोशन भी होगा। जाति और वर्ग-समुदाय के आधार पर बच्चों में घृणा और नफरत से बचाए जाने की जरूरत है। यह जितना होगा, उतना अच्छा है।
स्वामी रामदेव ने आगे कहा कि जातीय आधार पर किसी की प्रताड़ना न हो। न स्वर्ण की हो और न ही किसी पिछड़े, एससी, एसटी या आदिवासी की प्रताड़ना होनी चाहिए। इसके लिए हमें गंभीरता से विचार करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि एकतरफा यदि कोई कानून रहेगा और उससे किसी की प्रताड़ना होगी तो वह देश कहीं गृहयुद्ध जैसे स्थिति न पैदा कर दे, यह भी हमें ध्यान में रखना होगा।

