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खजान दास के पुत्र का विवाह हुआ विवादास्पद, प्रतिबंधित वस्तुओं को विवाह स्थल पर पहुँचाने पर वन विभाग के कई अधिकारी निलम्बित

कैबिनेट मंत्री खजान दास के बेटे की शादी की तैयारियां मां सुरेश्वरी देवी मंदिर परिसर में शुरू हुईं तो कुछ प्रतिबंधित सामान भी वहां पहुंच गया। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार भारी मात्रा में मदिरा और अन्य प्रतिबिन्धत वस्तुओं को लाने की कोशिश गई थी वहीं अन्य सूत्रों के अनुसार मदिरा को अन्दर पहुँचा दिया गया था। मंदिर परिसर को शादी के लिये भव्य रूप से सजाया गया था। उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री खजान दास के बेटे की शादी प्रदेश की राजनीति और पर्यावरण गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है। हरिद्वार के प्रतिबंधित राजाजी टाइगर रिजर्व के भीतर स्थित मां सुरेश्वरी देवी मंदिर में शादी के भव्य आयोजन को लेकर भारी हंगामा खड़ा हो गया. मामला बढ़ता देख वन प्रशासन ने न सिर्फ मंदिर समिति के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया, बल्कि मेहमानों के लिए जंगल के बीचों-बीच लगाया गया भारी-भरकम पंडाल भी हटवा दिया. मामला तब शुरू हुआ जब शनिवार को समाज कल्याण मंत्री खजान दास के बेटे अनुज की शादी की तैयारियों के लिए ट्रकों में भरकर टेंट, कुर्सियां और अन्य सामान राजाजी टाइगर रिजर्व की हरिद्वार रेंज में स्थित सुरेश्वरी देवी मंदिर पहुंचने लगा, आरक्षित क्षेत्र होने के कारण यहां किसी भी प्रकार के शोर-शराबे या बड़े निर्माण की मनाही है,  क्योंकि यह क्षेत्र हाथियों और गुलदारों का घर माना जाता है मंत्री के परिवार की शादी के चलते रविवार को मंदिर दर्शन के लिए पहुंचे आम श्रद्धालुओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा. कई श्रद्धालु दूर-दूर से आए थे. उन्हें दर्शन लाभ न हो सका. आरोप है कि आयोजन की सुरक्षा के चलते आम लोगों का प्रवेश बाधित रहा. कुछ मेहमान भी अपनी लग्जरी गाड़ियों के साथ गेट पर फंसे रहे और फोन खड़खड़ाते नजर आए, लेकिन वनकर्मियों ने नियमों का हवाला देते हुए उन्हें अंदर नहीं जाने दिया. विवाद पर कैबिनेट मंत्री खजान दास ने सफाई देते हुए कहा कि मां सुरेश्वरी के आशीर्वाद से उनके बेटे की तबीयत ठीक हुई थी, इसलिए उनकी गहरी आस्था थी कि शादी मंदिर परिसर में ही हो. उन्होंने आरोप लगाया कि जब वे पहले वन अधिकारियों के साथ यहां आए थे, तब किसी ने नहीं टोका, मंत्री ने कहा, “अगर मुझे पहले पता होता कि इसके लिए अलग से अनुमति चाहिए, तो मैं कहीं और आयोजन कर लेता।”  हालांकि, उन्होंने पूरे मामले को एक राजनीतिक साजिश करार दिया. प्रशासन के सख्त रुख और टेंट हटवाए जाने के बाद रविवार दोपहर शादी का कार्यक्रम बेहद सीमित कर दिया गया. मंत्री खजान दास अपने परिवार के साथ मंदिर पहुंचे और सादगी से केवल 7 फेरों और पूजा-अर्चना की रस्म पूरी की गई. उधर, टाइगर रिजर्व के वार्डन अजय लिंगवाल ने स्पष्ट किया कि आरक्षित वन क्षेत्र में किसी भी प्रकार के व्यावसायिक या निजी बड़े आयोजन की अनुमति नहीं दी जा सकती. मंदिर समिति के महामंत्री आशीष मारवाड़ी ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आयोजन इतने बड़े स्तर पर नहीं था जितना इसे प्रचारित किया गया, यह केवल पूजा और भंडारे जैसा कार्यक्रम था. फिलहाल, वन विभाग मामले की जांच कर रहा है कि आखिर गेट पर बिना अनुमति के इतने बड़े टेंट और ट्रकों को प्रवेश कैसे मिला!

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