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देश की ताकत का अंदाजा उसकी खेल नीति से जाना जा सकता है

देश 2030 में राष्ट्रमंडल खेल व 2036 में ओलंपिक आयोजित करने के लिए तैयार है और उसके लिए खिलाडिय़ों की खोज भी अभी से शुरू हो जानी चाहिए। आज जब हर बच्चा स्कूल जा रहा है तो फिर स्कूल से ही प्रतिभाओं को खोज कर प्रशिक्षित करना जरूरी हो जाता है। उसके लिए हर विद्यार्थी को फिटनेस कार्यक्रम से गुजरना जरूरी है, लेकिन प्राथमिक स्कूली स्तर पर फिटनेस कार्यक्रम शुरू करने की चर्चा तो दूर की बात लग रही है। दशकों से चल रहे प्राथमिक स्कूलों के खेलों को ही बंद कर दिया है। क्लासरूम पढ़ाई को संपूर्ण शिक्षा समझने वाले शिक्षा के कर्णधारों को कब विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के बारे में ज्ञान होगा? खेल बच्चों को फिटनेस की तरफ मोडऩे का बहुत ही सरल तरीका है और फिटनेस के बगैर जीवन अधूरा है। शिक्षण विषयों के रिपोर्ट कार्ड की तरह स्वास्थ्य के मानकों का रिपोर्ट कार्ड भी प्रत्येक विद्यार्थी का हर स्कूल में अनिवार्य रूप से हो, क्योंकि भाषा व अन्य शिक्षण विषयों की तरह ही स्वास्थ्य के मूल स्तंभ स्पीड, स्ट्रेंथ, इडोरैंस व लचक आदि का प्रायोगिक प्रशिक्षण भी उसी उम्र में शुरू करना होता है। शिक्षण विषयों के लिए तो स्कूलों के पास शिक्षक सहित पूरा प्रबंध है मगर स्वास्थ्य के घटकों को विकसित करके उनका मूल्यांकन करने की कोई भी सुविधा आज तक उपलब्ध नहीं हो पाई है। कई बार इस विषय पर स्कूलों व अभिभावकों को चेताया जा चुका है, मगर कोई भी समझने के लिए तैयार नहीं है। किसी भी देश को इतनी क्षति युद्ध या महामारी से नहीं होती है, जितनी तबाही नशे के कारण हो सकती है। देश के कई राज्यों में नशा युवा वर्ग पर ही नहीं किशोरों तक चरस, अफीम, स्मैक, नशीली दवाओं तथा दूरसंचार के माध्यमों के दुरुपयोग से शिकंजा कस रहा है। इसलिए सरकार, स्कूल प्रबंधन व अभिभावकों को इस विषय पर जरूरी कदम जल्दी ही उठा लेने चाहियें। यदि विद्यार्थी किशोरावस्था में नशे से बच जाता है तो वह फिर युवावस्था आते-आते समझदार हो गया होता है। माध्यमिक से वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय स्तर पर विद्यार्थियों को विभिन्न विद्याओं में व्यस्त रखने के साथ-साथ शारीरिक फिटनेस की तरफ मोडऩा बेहद जरूरी हो जाता है। मानव का सर्वांगीण विकास शिक्षा के बिना अधूरा है। शिक्षा की परिभाषा में लिखा है कि यहां शारीरिक व मानसिक दोनों तरह से बराबर विद्यार्थियों का विकास करना है जिससे वे आगे चलकर जीवन को सफलतापूर्वक खुशहाल जी सकंे। शारीरिक विकास के लिए खेलों के माध्यम से फिटनेस कार्यक्रम बहुत जरूरी हो जाता है। खेल ही वह माध्यम है जिसके द्वारा विद्यार्थी को नशे से दूर रखा जा सकता है। पंजाब एक समय तरक्की में देश का अग्रणी राज्य रहा है। खेलों में उत्कृष्टता उस प्रदेश की तरक्की व खुशहाली का भी पैमाना होती है। पंजाब में हजारों प्रशिक्षक विभिन्न खेलों में खेल प्रशिक्षण के लिए नियुक्त होने के साथ साथ खेल प्रशिक्षण के लिए आधारभूत ढांचा होना वहां के विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का प्रमुख कारण रहा था। बाद में जब पंजाब धीरे-धीरे खेलों से दूर हुआ तो पहले वहां आतंकवाद और फिर आजकल पंजाब नशे का अड्डा बना हुआ है। यही कारण है कि हर क्षेत्र में आज हरियाणा पंजाब से काफी आगे निकल गया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने एशियाई, राष्ट्रमंडल व ओलंपिक खेलों में पदक विजेता होने पर खिलाडिय़ों को करोड़ों रुपए के नगद ईनाम व सम्मानजनक नौकरी देकर हरियाणा में खेलों के लिए बहुत ही उपयुक्त वातावरण तैयार किया है। आज का विद्यार्थी फिटनेस व मनोरंजन के नाम पर दूरसंचार माध्यमों का कमरे में बैठ कर खूब दुरुपयोग कर रहा है। ऐसे में विद्यार्थी के सर्वांगीण विकास की बात मजाक लगती है। आज के विद्यार्थी के लिए विद्यालय या घर पर आधे घंटे के फिटनेस कार्यक्रम की सख्त जरूरत है। इसमें 15 से 20 मिनट धीरे-धीरे दौडऩा तथा विभिन्न कोणों पर शरीर के जोड़ों की विभिन्न क्रियाओं को पूरा करने के बाद शरीर को कूलडाऊन करना होगा। कम से कम बीस मिनटों तक तेज चलने, दौडऩे व शारीरिक क्रियाओं के करने से रक्त वाहिकाओं में रक्त संचार तेज हो जाता है। उससे हर मसल को उपयुक्त मात्रा में प्राणवायु मिलने से उसका समुचित विकास होता है। आज के विद्यार्थी को अगर कल का अच्छा नागरिक बनाना है, तो हमें स्कूली पाठ्यक्रम में उसके लिए सही फिटनेस कार्यक्रम भी देना होगा।

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