अमित शाह को यूँ ही आधुनिक भारतीय राजनीति का चाणक्य नहीं कहा जाता। वह जिस राज्य में अंगद की तरह पैर जमा कर बैठ जाते हैं वहां भाजपा की प्रचंड विजय सुनिश्चित कर देते हैं। पश्चिम बंगाल में कोई सोच नहीं सकता था कि टीएमसी और ममता बनर्जी की सरकार चली जायेगी लेकिन अमित शाह ने जो संकल्प ले लिया तो उसे सिद्ध होने से कोई रोक नहीं सकता। अमित शाह की चुनावी रणनीति को कोई भेद नहीं सकता और अमित शाह को चुनौती देने वाला ही आखिरकार घुटने टेकने पर मजबूर होता है यह बंगाल चुनावों ने दिखा दिया। टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी, पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी, टीएमसी सांसद डेरेक ओब्रायन और महुआ मित्रा ने अमित शाह को चुनाव प्रचार के दौरान तमाम तरह की चुनौतियां दीं लेकिन चुनाव परिणाम ने दर्शा दिया कि अमित
शाह चुनौतियों को भी चुनौती देने वाली शख्सियत हैं। हम आपको बता दें कि दोपहर करीब 12ः30 बजे जैसे ही घड़ी ने दस्तक दी, सोशल मीडिया पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का एक पुराना वीडियो अचानक वायरल हो गया। इस वीडियो में उन्होंने चुनावी रुझानों को लेकर जो समय और संकेत दिए थे, वे मौजूदा परिस्थितियों से एकदम मेल खा रहे थे। जैसे-जैसे मतगणना आगे बढ़ी, ‘कमल’ के खिलने की संभावना ने इस वीडियो को चर्चा के केंद्र में ला खड़ा किया है। वीडियो लग जायेगा। देखा जाये तो पश्चिम बंगाल में भाजपा की इस प्रचंड सफलता के केंद्र में अमित शाह की रणनीति और नेतृत्व को निर्णायक माना जा रहा है। इस चुनाव में उन्होंने केवल एक स्टार प्रचारक की भूमिका नहीं निभाई, बल्कि पूरे अभियान के मुख्य रणनीतिकार के रूप में कार्य किया। यह जीत सिर्फ एक लहर का परिणाम नहीं, बल्कि महीनों की सूक्ष्म योजना, संगठनात्मक मजबूती और जमीनी स्तर पर किए गए सतत प्रयासों का फल भी है। इस चुनाव में कई ऐसे चेहरे भी उभरकर सामने आए हैं, जिन्हें “साइलेंट हीरो” कहा जा रहा है। शुभेन्दु अधिकारी और दिलीप घोष जैसे स्थानीय नेताओं को आगे बढ़ाने की रणनीति ने भाजपा को मजबूत आधार दिया। इसके साथ ही मंगल पाण्डेय को राज्य प्रभारी बनाना भी एक सोचा-समझा कदम था। इन सबके पीछे अमित शाह की स्पष्ट रणनीतिक सोच काम कर रही थी, जिसमें स्थानीय नेतृत्व को प्राथमिकता देना शामिल था। रणनीतिक स्तर पर केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव की भूमिका भी बेहद अहम रही। हरियाणा और महाराष्ट्र के बाद बंगाल में भी उन्होंने अपनी चुनावी समझ और प्रबंधन क्षमता का प्रभाव छोड़ा। इसी तरह संगठन को मजबूत बनाने में सुनील बंसल और बिप्लब कुमार देब ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। ये सभी नेता सीधे शीर्ष नेतृत्व के संपर्क में रहकर काम कर रहे थे, जिससे रणनीति और क्रियान्वयन के बीच तालमेल बना रहा। चुनाव के दौरान अमित शाह का लगभग 15 दिनों तक पश्चिम बंगाल में डेरा जमाए रखना भी एक बड़ा फैक्टर रहा। उन्होंने बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने पर जोर दिया और कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरने का काम किया। साथ ही
भाजपा ने अपने संगठनात्मक ढांचे का पुनर्गठन करते हुए उन क्षेत्रों में भी पैठ बनाई, जहां पहले उसकी मौजूदगी सीमित थी। मुद्दों की बात करें तो भाजपा ने कानून-व्यवस्था, राजनीतिक हिंसा और भ्रष्टाचार जैसे विषयों को प्रमुखता से उठाया। घुसपैठ और नागरिकता संशोधन कानून को भी चुनावी विमर्श के केंद्र में रखा गया। पार्टी ने दावा किया कि राज्य में अवैध घुसपैठ एक गंभीर समस्या है, जिसे नियंत्रित करना आवश्यक है। साथ ही, यह वादा भी किया गया कि सत्ता में आने पर को लागू किया जाएगा और सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाएगा। महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। अमित शाह ने तृणमूल कांग्रेस सरकार पर कट-मनी, भ्रष्टाचार और खराब शासन के आरोप लगाते हुए यह संदेश देने की कोशिश की कि राज्य में बदलाव की जरूरत है। उन्होंने विकास, निवेश और रोजगार के नए अवसरों का वादा कर मतदाताओं को आकर्षित किया। बहरहाल, अमित शाह के बारे में कहा जा सकता है कि उन्होंने जिस शिद्दत के साथ बंगाल में मेहनत की और खुद पूरे चुनाव अभियान का नेतृत्व किया उससे समय रहते चूक या गलतियों की संभावनाएं खत्म हो गयीं और आजादी के बाद पहली बार पश्चिम बंगाल में भगवा राज आ गया। वहीं दूसरी तरफ अमेरिका में बसे भारतीयों ने भाजपा की इस जीत पर स्वागत किया है। उन्होंने इसे ऐतिहासिक जनादेश और राज्य में शासन, सुरक्षा और विकास के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ बताया है। प्रख्यात भारतीय अमेरिकी डॉ. भरत बराई ने इस परिणाम को पश्चिम बंगाल की जनता के लिए एक बड़ी जीत बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने राज्य के सभी संसाधनों का उपयोग करके एक माफिया साम्राज्य को बढ़ावा दिया। उन्होंने कहा कि मतदाताओं को बलात्कार, आगजनी, हत्या जैसी धमकियों से धमकाया और उन्हें मतदान करने से रोका। उन्होंने यह भी दावा किया कि टीएमसी के गुंडों ने ईवीएम पर भाजपा उम्मीदवारों के लिए मतदान बटनों को टेप से ढक दिया और ब्लॉक कर दिया। पश्चिम बंगाल में आतंक के शासन से लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किया गया है। ओवरसीज फ्रेंड्स ऑफ बीजेपी (ओएफबीजेपी-यूएसए) के अध्यक्ष डॉ. अदापा प्रसाद ने बंगाल और विशेष रूप से असम की जनता को भाजपा की बंगाल में ऐतिहासिक और असम में शानदार जीत पर हार्दिक बधाई दी। उन्होंने आगे कहा कि पार्टी ने पुडुचेरी में भी बड़ी जीत हासिल की और केरल में महत्वपूर्ण लाभ प्राप्त किए, जबकि तमिलनाडु में सीटों की संख्या में यथास्थिति बनाए रखी। डॉ. अदापा प्रसाद ने कहा कि इस परिणाम के व्यापक निहितार्थ हैं। उन्होंने कहा, भाजपा की बंगाल में जीत भारत की सुरक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। बंगाल के बुरे दिन अब समाप्त हो गए हैं। उन्होंने आगे कहा कि राज्य ने 50 वर्षों तक बेरोकटोक गुंडागर्दी, जबरन वसूली, हिंसा, घुसपैठ, जनसांख्यिकीय परिवर्तन, उद्योगों की हानि और अन्य समस्याओं का सामना किया है। ओएफबीजेपी-यूएसए के महासचिव डॉ. वासुदेव पटेल ने राज्य के रणनीतिक महत्व पर जोर देते हुए कहा, ष्पूर्व में स्थित भारत का यह सीमावर्ती राज्य राष्ट्र की सुरक्षा और अखंडता के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि संगठन संयुक्त राज्य अमेरिका भर में विजय समारोह आयोजित करने की योजना बना रहा है। हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. इंद्रनील बसु-रे ने कहा कि दशकों के शासन के कारण पूर्ण औद्योगीकरण का पतन, व्यापक बेरोजगारी, बढ़ती गरीबी और बुनियादी संसाधनों की कमी के साथ-साथ अपराध की अत्यधिक मात्रा भी हुई है, जिसमें एक आपराधिक गिरोह सड़कों पर राज कर रहा है। उन्होंने कहा, देशभक्त बंगालियों के 50 वर्षों से अधिक के संघर्ष के बाद बंगाल में भाजपा की शानदार जीत हासिल हुई है। उन्होंने आगे कहा कि यह क्षण बंगाल की गरिमा को पुनः प्राप्त करने और उसकी आध्यात्मिक गौरव को फिर से स्थापित करने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने कहा, यह ऐतिहासिक जनादेश जनता के विश्वास, आकांक्षाओं और मजबूत शासन, विकास और सांस्कृतिक गौरव की इच्छा को दर्शाता है। एआईटीसी के अप्रभावी और अक्षम शासन का अंत बंगाल के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत है। सामुदायिक नेता अमिताभ मित्तल ने कहा कि इस जीत से नई उम्मीद जगी है कि बंगाल अपनी पुरानी शान को फिर से हासिल करेगा और उस विकास, समृद्धि और प्रगति की ओर बढ़ेगा जिससे वह बहुत लंबे समय से वंचित रहा है। उन्होंने भाजपा नेतृत्व, कार्यकर्ताओं, समर्थकों और मतदाताओं को बधाई दी जिन्होंने इस जीत को संभव बनाने के लिए अथक प्रयास किया। उन्होंने कहा कि यह जनादेश बंगाल के लिए शांति, समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य लेकर आएगा।
बंगाल में लहराया परचम भाजपा का, देश की अखंडता के लिये जरूरी था बदलाव












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