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उत्तराखण्ड में बेरोजगारी बना बड़ा मुद्दा, अच्छी शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद उत्तराखण्डी युवाओं का नहीं हो रहा विवाह, बढ़ते क्राइम के पीछे भी बेरोजगारी का असर

उत्तराखण्ड। वर्तमान में बेरोजगारी का असर इतना अधिक दिख रहा है कि उत्तराखण्ड के युवाओं की आयु अधेड़ अवस्था में पहुँचने के बाद भी उनका विवाह नही हो रहा है। यह अत्यंत चिन्ता का विषय है कि रोजगार के आभाव के कारण उनकी आयु 35 से 45 तक हो गई है उसके बावजूद भी विवाह नहीं हो रहे हैं। हालांकि अति उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद भी उनकी प्राप्त की गई शिक्षा और डिग्री के मायने खत्म प्रतीत हो रहे हैं। बेरोजगारी के कारण लड़कों की उम्र 40 वर्ष तक पहुंच गई है लेकिन विवाह नहीं हो रहे।
ऐसा नहीं कि सरकार इस विषय पर नहीं सोच रही है, सरकार इस विषय पर गम्भीर है और युवाओं के लिये कई सौ करोड़ की योजनाऐं चला रही हैं परन्तु धरातल पर उन योजनाओं के विषय में लोगों तक जानकारी नहीं पहुँच पा रही है जबकि पिछले बजट में प्रधानमंत्री मोदी ने साढ़े तीन लाख करोड़ रूपये बेरोजगारी को देखते हुऐ एमएसएमई और युवाओं के लिये निकाले थे लेकिन यदि कोई युवा अपना उद्योग लगाना चाहता है तो बैंकों की फॉरमैलिटी इतनी कठिन है कि उसे पूरा करते-करते पात्र हार मान लेता है। वहीं दूसरी तरफ कुछ युवाओं के माता-पिता जो आर्थिक स्थिति से सबल हैं वह लोग अपने युवा पुत्र और पुत्रियों को बेहतर शिक्षा का बोझ उठाते हुऐ आधुनिक शिक्षा के लिये प्रदेश से बाहर शिक्षण संस्थानों में आने वाले समय के अनुसार तमाम प्रकार के कोर्स करा रहे हैं जिससे वह शिक्षा जॉब ओरियेन्टेड होती है इसलिये उन्हें इस बात की चिन्ता नहीं सताती कि उनके युवाओं को नौकरी नहीं मिलेगी, लेकिन उन युवा पीड़ी का क्या होगा जो इतने महंगे कोर्स के लिये आर्थिक रूप से कमजोर हैं ? विडम्बना देखिये जिन युवाओं ने अच्छी और बेहतर शिक्षा प्राप्त की है वह युवा रोज की दिहाड़ी पर काम करने के लिये मजदूर बन गया है या फिर दस हजार की प्राईवेट नौकरी करने के लिये मजबूर है। अब उस युवा और पढ़े लिखे मजदूर से विवाह करने के लिये लड़की के माता-पिता क्या अपनी पुत्री का विवाह उससे करेंगे। यह सबसे बड़ा सवाल है ? बेरोजगारी इस हद तक बढ़ गई है कि पुराने क्राइम के आंड़कों पर नजर डाली जाये तो 80 प्रतिशत क्राइम करने वाले युवाओं का कारण रोजगार का ना होना है। अगर कोरोना काल से अब तक हुऐ क्राइम में जिन युवाओं ने अपराध किये हैं उसका मूलभूत कारण बेरोजगारी था। अगर अपराधिक गतिविधियों पर नजर डाले तो केवल हत्या ही इसका उदाहरण नहीं है। बेरोजगारी के कारण आये दिन ठगी जैसे मामले भी सामने आ रहे हैं, जिसमें अधिकतर ठगी करने वाले युवक अच्छे स्कूल से शिक्षा ग्रहण किये हुऐ हैं लेकिन नौकरी के आभाव में अपनी तीक्ष्ण बुद्धी का इस्तमाल ठगी जैसे कार्यों में लगा रहे हैं। ठगी करने के लिये युवकों का साथ युवतियाँ भी दे रही हैं। इसके पता चलता है कि कई क्राइम के मामले बेरोजगारी है।

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