कुरान की एक आयत सूरा अलबक़रा 230 में स्पष्ट लिखा है कि अगर कोई शौहर अपनी पत्नी को तलाक़ देता है तो उसे पहले किसी दूसरे पुरुष ने निकाह करना पड़ेगा। अब उस दूसरे पुरुष की मर्ज़ी पर है कि वह उस स्त्री को कब तलाक देगा। जब वह दूसरा पुरुष तलाक देगा तो उसका निकाह अपने पहले पति के साथ हो सकेगा। किसी कारण वस् वह दूसरा पुरुष तलाक ना दे तो पहले पति को कोई अधिकार कुरआन में नहीं है। इसी एक लोच से बचने के लिए मुस्लिम देशों में हलाला के अड्डे खुले हुए हैं। जो तलाक की गारंटी लेते हैं इसके बावजूद देश में आपको बहुत से ऐसे केस भी मिल जायेंगे जहाँ उस स्त्री के दूसरे पति ने तलाक़ नहीं दिया और मजबूरन उसे जीवनभर उसी दूसरे आदमी के पास रहना पड़ा अपने बच्चों तक को छोड़कर। आप सोचिये कि यह प्रथा कल्पना करने पर भी कितनी घिनौनी लगती है। ऐसी ही एक नहीं सैकड़ों बाते हैं जिनपर आज के सलीम वास्तिक जैसे एक्स मुस्लिम अपनी बात रखते हैं इसी का दर्द मौलवियों के पेट में होता है। चूँकि उनके पास कोई तर्क नहीं है तो फिर एक ही कुतर्क है जो सवाल उठाए उसकी जुबान बंद कर दो। लेकिन कब तक। आज इंटरनेट के माध्यम से तमाम सच लोगों तक पहुँच रहा है और पहुंचता रहेगा।
क्या महिला होना गुनाह है इस्लाम में तलाक की प्रक्रिया की पूरी बात जानिये











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