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उत्तराखण्ड की राजधानी देहरादून में बिगड़ती यातायात व्यवस्था, बढ़ती आबादी और कमजोर प्रबंधन

देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में यातायात व्यवस्था दिन-प्रतिदिन गंभीर समस्या बनती जा रही है। शहर की सड़कों पर बढ़ते वाहनों की संख्या, अपर्याप्त पार्किंग व्यवस्था और सीमित सड़क चौड़ाई के कारण आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सुबह और शाम के समय शहर के प्रमुख चौराहों पर लंबा जाम लगना अब आम बात हो गई है। असल में पिछले 10 वर्षों में आंकड़ो के अनुसार वाहनो की बिक्री में बढ़ोतरी के कारण सड़कों पर वाहनो का दबाव लगातार बढ़ रहा है और देहरादून की आबादी तेजी से बढ़ रही है और इसके साथ-साथ वाहनों की संख्या भी लगातार बढ़ती जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में शहर में दोपहिया और चारपहिया वाहनों की संख्या कई गुना बढ़ चुकी है। लेकिन सड़कें और यातायात प्रबंधन उसी अनुपात में विकसित नहीं हो पाए हैं। शहर के कई प्रमुख मार्गों और चौराहों पर हर दिन यातायात का दबाव साफ दिखाई देता है। इन इलाकों में कार्यालय समय और स्कूल खुलने-छुटने के समय लंबा जाम लग जाता है। अव्यवस्थित पार्किंग को भी बड़ी वजह माना गया है। शहर में पर्याप्त पार्किंग स्थलों की कमी के कारण लोग सड़कों के किनारे ही वाहन खड़े कर देते हैं। इससे सड़कें संकरी हो जाती हैं और यातायात बाधित होता है। कई बाजारों में तो स्थिति इतनी खराब हो जाती है कि पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है।
यातायात जाम के कारण लोगों का समय बर्बाद हो रहा है और ईंधन की खपत भी बढ़ रही है। स्कूल जाने वाले बच्चों, कार्यालय कर्मचारियों और मरीजों को अस्पताल पहुँचने में भी काफी देर हो जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिति सुधारने के लिए प्रशासन को कई कदम उठाने होंगे, जैसेः-
शहर में ’’मल्टी-लेवल पार्किंग’’ का निर्माण, सार्वजनिक परिवहन को मजबूत बनाना, प्रमुख चौराहों पर स्मार्ट ट्रैफिक सिग्नल लगाना, अतिक्रमण हटाना और आदि कार्रवाई करना। देहरादून की पहचान एक शांत और व्यवस्थित शहर के रूप में रही है, लेकिन तेजी से बढ़ती आबादी और वाहनों के दबाव ने इसकी यातायात व्यवस्था को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।

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