उत्तराखण्ड। देहरादून शहर में पिछले कुछ वर्षों में पैथोलॉजी सेंटरों की संख्या तेजी से बढ़ी है। शहर की लगभग हर गली और बाजार में छोटे-बड़े पैथोलॉजी लैब खुल गए हैं, लेकिन इनमें से कई सेंटरों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। मरीजों और उनके परिजनों का आरोप है कि कई लैब सही जांच रिपोर्ट नहीं दे रही हैं, जिसके कारण लोगों का गलत इलाज हो रहा है और उनकी जान तक जोखिम में पड़ रही है। हाल ही में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया, जिसमें एक मरीज ने एक पैथोलॉजी सेंटर में ब्लड टेस्ट कराया। मात्र 15 मिनट बाद उसी मरीज ने वही जांच दूसरे सेंटर में कराई तो दोनों रिपोर्टों में जमीन-आसमान का अंतर देखने को मिला। एक रिपोर्ट में गंभीर बीमारी की आशंका जताई गई,
जबकि दूसरी रिपोर्ट सामान्य निकली। इस घटना ने लोगों के मन में पैथोलॉजी जांच की विश्वसनीयता को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कई लैब बिना अनुभवी पैथोलॉजिस्ट और प्रशिक्षित तकनीशियनों के संचालित हो रही हैं। कई जगहों पर मशीनों की नियमित कैलिब्रेशन तक नहीं होती, जिससे रिपोर्ट की सटीकता प्रभावित होती है। उत्तराखंड में पहले भी बिना विशेषज्ञ डॉक्टरों के पैथोलॉजी लैब चलने की शिकायतें सामने आ चुकी हैं। देहरादून में गलत पैथोलॉजी रिपोर्ट का एक बड़ा मामला पिछले वर्ष भी आया था, जब एक महिला को गलत तरीके से ब्रेस्ट कैंसर घोषित कर दिया गया था। बाद में दूसरी जांच में रिपोर्ट गलत निकली और उपभोक्ता आयोग ने संबंधित लैब पर भारी जुर्माना लगाया था। स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग को समय-समय पर पैथोलॉजी लैब की जांच करनी चाहिए और जिन सेंटरों में मानकों का पालन नहीं हो रहा है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। मरीजों का यह भी कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर ही डॉक्टर इलाज तय करते हैं, इसलिए गलत रिपोर्ट किसी भी व्यक्ति की जिंदगी के साथ खिलवाड़ साबित हो सकती है। विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि किसी भी गंभीर बीमारी की स्थिति में एक से अधिक लैब से जांच अवश्य कराएं और केवल मान्यता प्राप्त तथा अनुभवी पैथोलॉजी सेंटरों पर ही भरोसा करें।
उत्तराखण्ड में पैथॅलोजियों की बाढ़, मरीजों को नहीं मिल रही सही रिर्पोट, एक रिर्पोट में आया जमीन आसमान का फर्ख








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